वैशाली:जिले की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहरों के सरंक्षण और पुनरुत्थान के लिए किए जा रहे सार्थक प्रयास

Rakesh Gupta
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डॉ०संजय(हाजीपुर)-
वैशाली जिले में ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और पुनरुत्थान की दिशा में जिला पदाधिकारी, वैशाली द्वारा प्रभावी और सतत प्रयास किए जा रहे हैं। पंचायती राज विभाग, बिहार सरकार के सहयोग से जिले में ‘मेरा गाँव–मेरी धरोहर (एमजीएमडी)’ अभियान को पंचायत स्तर तक सशक्त रूप से लागू किया गया है।

जिला पदाधिकारी के नेतृत्व में चल रहे इस अभियान के अंतर्गत अब तक जिले भर में कुल 671 धरोहर स्थलों की पहचान की जा चुकी है। प्रखंडवार आंकड़ों के अनुसार पातेपुर प्रखंड सबसे आगे है, जहाँ 136 धरोहर स्थलों को चिन्हित किया गया है।

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इस अभियान के तहत जहां एक ओर विश्वविख्यात एवं सर्वविदित धरोहर वैशाली स्तूप को प्रमुख रूप से शामिल किया गया है, वहीं दूसरी ओर जिले की कई छिपी हुई और कम-ज्ञात धरोहरों को भी सामने लाया जा रहा है। इनमें बाबा गणिनाथ मंदिर, पलवैया धाम, वैशाली प्रखंड के मझौली गांव में स्थित प्राचीन बरगद का ऐतिहासिक वृक्ष, तथा गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा जैसे स्थल शामिल हैं, जो स्थानीय आस्था और सामाजिक इतिहास से जुड़े होने के बावजूद अब तक व्यापक पहचान से वंचित रहे थे।

जिला पदाधिकारी के निर्देश पर प्रखंड विकास पदाधिकारी, प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी, अन्य प्रखंड स्तरीय पदाधिकारी, पंचायत सचिव एवं स्थानीय समितियों को स्पष्ट दायित्व सौंपे गए हैं। पंचायती राज विभाग द्वारा निर्धारित समयबद्ध कार्ययोजना के अनुरूप प्रशिक्षण, सर्वेक्षण, सत्यापन एवं दस्तावेजीकरण की प्रक्रिया की सतत निगरानी की जा रही है।

‘मेरा गाँव–मेरी धरोहर’ अभियान न केवल वैशाली की सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित कर रहा है, बल्कि भविष्य में पर्यटन, शोध एवं ग्रामीण विकास के नए अवसर भी सृजित करेगा। यह पहल जिला पदाधिकारी, वैशाली की दूरदर्शिता, सक्रिय कार्यशैली और जिले की विरासत के प्रति प्रतिबद्धता को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।

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