अर्जुन कुमार झा/धर्मविजय गुप्ता/समस्तीपुर/खानपुर प्रखंड अंतर्गत राजकीय प्राथमिक विद्यालय पंचगछिया, हाँसोपुर में मध्याह्न भोजन (एमडीएम) योजना में गंभीर अनियमितता का मामला सामने आया है।
आरोप है कि विद्यालय में गुरुवार को बच्चों के लिए मध्याह्न भोजन नहीं बनाया गया,जिसके कारण दर्जनों छात्र-छात्राएं दोपहर में भूखे ही अपने घर लौटने को मजबूर हो गए।
वहीं विद्यालय के प्रधानाध्यापक बिना किसी विधिवत आवेदन के अनुपस्थित पाए गए,जिससे विद्यालय की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
प्रत्यक्ष जानकारी के अनुसार,दोपहर करीब 12 बजे जब बड़ी संख्या में बच्चे विद्यालय छोड़कर घर की ओर जा रहे थे, तब उन्हें रोककर कारण पूछा गया। बच्चों ने बताया कि विद्यालय में आज खाना नहीं बना है, इसलिए वे भोजन करने के लिए घर जा रहे हैं। बच्चों के इस जवाब ने विद्यालय में संचालित मध्याह्न भोजन योजना की वास्तविक स्थिति उजागर कर दी।बताया जाता है कि विद्यालय में लगभग 150 बच्चों का नामांकन है।

गुरुवार को विद्यालय के उपस्थिति पंजी में कक्षा 1 से 5 तक कुल 72 बच्चों की उपस्थिति दर्ज की गई थी। लेकिन जब कक्षाओं का निरीक्षण किया गया तो वहां केवल चार बच्चे ही मौजूद मिले।अधिकांश बच्चे विद्यालय परिसर से बाहर निकल चुके थे और घर की ओर जा रहे थे।मामले की जानकारी तत्काल प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (बीईओ) को दी गई।

इसके बाद उन्होंने विद्यालय में मौजूद शिक्षक आशिक वकील से फोन पर बात की।शिक्षक ने स्वीकार किया कि आज विद्यालय में मध्याह्न भोजन नहीं बना है। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि विद्यालय के प्रधानाध्यापक आज विद्यालय नहीं आए हैं और उन्होंने केवल फोन पर अनुपस्थित रहने की सूचना दी थी। बताया गया कि प्रधानाध्यापक द्वारा अवकाश के लिए कोई औपचारिक आवेदन भी उपलब्ध नहीं था।इस घटना ने विद्यालय की कार्यप्रणाली,बच्चों के पोषण और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
मध्याह्न भोजन योजना का उद्देश्य बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना और विद्यालय में उनकी नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना है।लेकिन भोजन नहीं बनने से बच्चे भूखे घर लौटने को विवश हुए।प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि पूरे प्रकरण की जांच कराई जाएगी। यदि जांच में लापरवाही या अनियमितता की पुष्टि होती है तो संबंधित प्रधानाध्यापक एवं जिम्मेदार कर्मियों के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि विद्यालयों में इस तरह बच्चों के भोजन और शिक्षा के साथ लापरवाही होती रही तो सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा। ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की है।
