राजेंद्र सरोवर भूमि विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, हाईकोर्ट के आदेश पर आगे की कार्रवाई पर रोक

Rakesh Gupta
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दीपक कुमार, खगड़िया

नगर परिषद खगड़िया की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया, 27 अगस्त के पटना हाईकोर्ट आदेश के आधार पर कार्रवाई पर अंतरिम रोक का दावानई दिल्ली, 30 सितंबर 2026।

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सन्हौली स्थित राजेंद्र सरोवर से संबंधित खाता संख्या 159 एवं प्लॉट संख्या 485 की भूमि के विवाद को लेकर नगर परिषद खगड़िया द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका पर बुधवार को सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई हुई।

नगर परिषद की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करते हुए पटना हाईकोर्ट के 27 अगस्त 2026 के आदेश के आधार पर आगे की कार्यवाही पर रोक लगा दी है।मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति एम.एम. सुन्दरेश एवं न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले की पीठ के समक्ष हुई।

नगर परिषद की ओर से अधिवक्ता-ऑन-रिकॉर्ड नितेश रंजन ने पक्ष रखा।स्वामित्व और राजस्व अभिलेखों से जुड़े सवाल उठाएनगर परिषद की ओर से सुप्रीम कोर्ट में यह पक्ष रखा गया कि विवादित भूमि के स्वामित्व, कब्जे एवं राजस्व अभिलेखों से जुड़े प्रश्नों का अंतिम निर्धारण किए बिना केवल मापी के आधार पर भूमि रिलीज करने का आदेश कानूनी प्रश्न खड़ा करता है।

सुनवाई के दौरान नगर परिषद की ओर से मामले को केवल मापी का विषय न बताते हुए भूमि के टाइटल, स्वामित्व, कब्जे एवं राजस्व अभिलेखों से संबंधित विवाद के रूप में प्रस्तुत किया गया। परिषद की ओर से यह तर्क रखा गया कि टाइटल का अंतिम निर्धारण नहीं होने की स्थिति में मापी के आधार पर भूमि रिलीज करने के आदेश का प्रभाव किसी पक्ष के पक्ष में स्वामित्व संबंधी अधिकार निर्धारित करने जैसा हो सकता है।सुप्रीम कोर्ट द्वारा नोटिस जारी किए जाने और अंतरिम आदेश के बाद मामले की आगे की न्यायिक प्रक्रिया जारी रहेगी।

अर्चना कुमारी के नेतृत्व में नगर परिषद ने दाखिल की याचिकानगर परिषद के अनुसार, पटना हाईकोर्ट के 27 अगस्त 2026 के आदेश के बाद नगर सभापति अर्चना कुमारी के नेतृत्व में नगर परिषद ने मामले को सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष चुनौती देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई।नगर परिषद का कहना है कि राजेंद्र सरोवर की भूमि एवं उससे जुड़े अधिकारों की कानूनी स्थिति स्पष्ट होना सार्वजनिक संपत्ति के संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

कार्यपालक पदाधिकारी की भूमिका का भी उल्लेखनगर परिषद की ओर से बताया गया कि मामले को सर्वोच्च न्यायालय तक ले जाने की प्रक्रिया में कार्यपालक पदाधिकारी सिंधु कमल की प्रशासनिक भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। संबंधित दस्तावेजों, प्रशासनिक अभिलेखों एवं कानूनी प्रक्रिया के लिए आवश्यक समन्वय में सहयोग किए जाने की बात नगर परिषद की ओर से कही गई है।

राजेंद्र सरोवर के सौंदर्यीकरण से भी जुड़ा मामलाराजेंद्र सरोवर के विकास एवं सौंदर्यीकरण के लिए करीब ₹9.50 करोड़ की योजना का प्रस्ताव नगर परिषद की ओर से पहले से बताया गया है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, योजना में हाईमास्ट लाइट, वॉकिंग ट्रैक, नौका विहार सुविधा एवं चारों ओर बाउंड्री निर्माण सहित विकास कार्य प्रस्तावित हैं।

नगर परिषद का कहना है कि भूमि से जुड़े कानूनी प्रश्नों की स्थिति स्पष्ट रहते हुए सार्वजनिक विकास योजना को आगे बढ़ाना आवश्यक है।नगर सभापति ने कहा—सार्वजनिक संपत्ति का संरक्षण प्राथमिकतानगर सभापति अर्चना कुमारी के अनुसार, नगर परिषद का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष से विवाद करना नहीं, बल्कि राजेंद्र सरोवर जैसी सार्वजनिक संपत्ति के संरक्षण तथा नगरहित से जुड़े विकास कार्यों को कानून के अनुरूप आगे बढ़ाना है।

उन्होंने कहा कि नगर परिषद ने अपने अधिकारों एवं सार्वजनिक हित से जुड़े प्रश्नों को न्यायिक मंच के समक्ष रखा है और न्यायालय की प्रक्रिया का सम्मान किया जाएगा।सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के बाद अब मामले की अगली न्यायिक प्रक्रिया पर सभी पक्षों की नजर है। नगर परिषद इसे राजेंद्र सरोवर की भूमि एवं प्रस्तावित विकास योजना से जुड़े महत्वपूर्ण कानूनी घटनाक्रम के रूप में देख रही है।

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