*मंत्र सिद्धि का स्थान पुष्कर
*कथा में जो न आये , कोई बहाना नहीं
*कलश यात्रा 108 महिलाओं द्वारा शोभायात्रा
(हरिप्रसाद शर्मा) पुष्कर/ अजमेर/ धार्मिक तीर्थ पुष्कर में गुरुवार को संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण श्रीमन्माध्वगौडेश्वर वैष्णवाचार्य पुण्डरीक गोस्वामी प्रेम प्रकाश आश्रम में कराते हुए कहा कि कथा भगवान का प्रसाद है ।
कथा प्रारंभ से पूर्व 108 महिलाओं ने पवित्र पुष्कर सरोवर से जल लेकर वराह घाट से बैंड बाजों के साथ मुख्य मार्ग से होते कथा स्थल पहुँची।
पुण्डरीक गोस्वामी ने कहा की देश में दो ही राज है, एक प्रयागराज, दूसरा पुष्कर राज है किसी के साथ राज नहीं लगता है । उन्हीं के साथ लगता है ।कथा के दौरान पुष्कर का संकीर्तन किया । श्रीमद्भागवत के बारे मैं वर्णन करते कहा कि जिसकी सेवा में 18 पुराण रहते हैं ।
गोस्वामी ने कहा कथा में जो न आये , कोई बहाना नहीं है । यदि बहाना है तो कथा नहीं व्यथा है । कथा के दौरान श्रोताओं से कह कि संकल्प का बल नहीं, संबंध का बल संबंध प्रदान करता है ।उन्होंने यह भी कहा कि मंत्र सिद्धि का स्थान पुष्कर को बताया है। उन्होंने कहा कि पुष्कर तीर्थ के पहले अयोध्या नगरी , काशी तीर्थ है । पुष्कर में सृष्टि का क्रम बताया है ।
उन्होंने कहा कि पुष्कर में श्रीमद्भागवत कथा नहीं बल्कि यह श्रीमद् ब्रह्म भागवत है । श्रोताओं को कहा कि भगवान त्रिगुण रूप में रहते हैं । जानने वाले को गुण बताते हैं । उन्होंने ने कहा कि भगवान को मथुरा से वृन्दावन आने का मार्ग यमुना जी ने बताया है । उन्होंने कहा कि गुरुवार छठ को यमुना जी का प्राकट्य के बारे में भी बताया है ।
गोस्वामी ने श्रोताओं से मंदिर जाते है तो कुछ देर मंदिर के घंटा के नीचे खड़ा रहना चाहिए । खड़े होकर घंटा बजाने से उसकी नाद से पूरा ओरा स्वच्छ हो जाता है । श्रीमद्भागवत के तीन अलग-अलग कथा के मंगलाचरण होते हैं ।
आयोजक पंडित सुरेश शर्मा परिवार के नरेन्द्र शर्मा, वेंकटेश शर्मा ने कथावाचक का व्यासपीठ से श्रीमद्भागवत का माला पहनाकर स्वागत किया । कथा का श्रवण के लिए सैकड़ों श्रोताओं पांडाल में मौजूद थे ।