वैशाली जिले में बाल श्रम के विरुद्ध कार्रवाई में 03 बाल श्रमिक हुए विमुक्त

Rakesh Gupta
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डॉo संजय (हाजीपुर)-वैशाली जिले में बाल श्रम उन्मूलन को लेकर गठित धावादल द्वारा लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में 19 अगस्त 2026 को धावादल ने पटेढ़ी बेलसर एवं लालगंज प्रखंड क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए कुल 03 बाल श्रमिकों को विमुक्त कराया।धावादल द्वारा पटेढ़ी बेलसर स्थित मेसर्स सूरज ऑटो गैराज, साईं चौक से 01 तथा लालगंज स्थित मेसर्स अपनी साइकिल दुकान, मंगलकॉटी से 02 बाल श्रमिकों को विमुक्त कराया गया।

कार्रवाई के दौरान यह भी जानकारी मिली कि बाल श्रमिकों को नियमानुसार न्यूनतम मजदूरी का भुगतान नहीं किया जा रहा था।जिला पदाधिकारी, वर्षा सिंह के निर्देश के अनुरूप बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 यथा संशोधित 2016 के प्रावधानों के तहत नियोजकों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। संबंधित श्रम प्रवर्तन पदाधिकारियों को प्राथमिकी दर्ज कराने एवं अन्य आवश्यक अनुवर्ती कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, 1948 के तहत भी कार्रवाई की जा रही है।

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विमुक्त कराए गए सभी 03 बाल श्रमिकों को बाल कल्याण समिति, हाजीपुर के समक्ष प्रस्तुत कर सुपुर्द कर दिया गया है। बाल श्रम नियोजित कराने वाले नियोजकों के विरुद्ध नियमानुसार 20,000 रुपये से 50,000 रुपये तक जुर्माना अथवा छह माह तक के कारावास अथवा दोनों का प्रावधान है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के आलोक में प्रत्येक बाल श्रमिक के लिए नियोजक को 20,000 रुपये बाल श्रमिक पुनर्वास कोष में जमा करना होगा।विमुक्त बाल श्रमिकों को तत्काल आर्थिक सहायता के रूप में प्रति बाल श्रमिक 3,000 रुपये उनके बैंक खाते में उपलब्ध कराए जाने की कार्रवाई की जाएगी।

साथ ही मुख्यमंत्री राहत कोष से प्रति बाल श्रमिक 25,000 रुपये की राशि उनके नाम से फिक्स्ड डिपॉजिट कराई जाएगी।जिला पदाधिकारी, वर्षा सिंह के मार्गदर्शन में बाल श्रम से विमुक्त बच्चों एवं उनके परिवारों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए संबंधित विभागों के बीच समन्वय सुनिश्चित किया जा रहा है। शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य सहित अन्य संबंधित विभागों द्वारा पात्रता के अनुसार आवश्यक लाभ उपलब्ध कराया जाएगा। इसका उद्देश्य केवल बाल श्रमिकों को विमुक्त कराना ही नहीं, बल्कि उन्हें शिक्षा, सुरक्षा, पुनर्वास एवं सामाजिक-आर्थिक संरक्षण से जोड़ना है।अभियान में श्रम प्रवर्तन पदाधिकारियों के साथ सामाजिक सेवा संस्थान एवं पुलिस पदाधिकारी भी शामिल रहे।

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