.मृगांक शेखर सिंह/ जमुई जमुई जिला अंतर्गत चंद्रदीप थाना क्षेत्र के सोलहपुर गांव निवासी स्वर्गीय संजय सिंह के पुत्र इंजीनियरिंग छात्र आशीष कुमार की सड़क दुर्घटना में दर्दनाक मौत हो गई. मिली जानकारी अनुसार नालंदा के सालेहपुर मोड़ के पास कार गड्ढे में पलटी, इंजीनियरिंग के 2 छात्रों की मौत, 3 की हालत नाजुकचंडी थाना क्षेत्र के सालेहपुर मोड़ और गौढ़ापर के बीच तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर गहरे गड्ढे में जा पलटी। इस दर्दनाक हादसे में नालंदा इंजीनियरिंग कॉलेज के दो होनहार छात्रों की मौके पर ही मौत हो गई.

बिहार के नालंदा जिले में तेज रफ्तार का कहर देखने को मिला है। इसके चलते हुए दर्दनाक सड़क हादसे में दो इंजीनियरिंग छात्रों की मौत हो गई। जबकि उनके तीन दोस्तों गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। उनकी हालत नाजुक बताई जा रही है। तीनों का इलाज अस्पताल में चल रहा है। घटना जिले के चंडी थाना क्षेत्र के सालेहपुर मोड़ और गौढ़ापर के बीच आज शुक्रवार की दोपहर हुई है। हादसे के बाद चीख-पुकार मच गई।नालंदा में कार गड्ढे में पलटी, दो इंजीनियरिंग छात्रों की मौतमिली जानकारी के मुताबिक, तेज रफ्तार के कहर ने दो होनहार इंजीनियरिंग छात्रों की जान ले ली, जबकि उनके तीन साथी गंभीर रूप से घायल हो गए।
यह हादसा इतना भयावह था कि सड़क किनारे गड्ढे में गिरते ही कार के परखच्चे उड़ गए। देखते ही देखते ‘खुशियों का सफर’ मातम में बदल गया।चंडी की ओर से आ रही थी तेज रफ्तार कार, सवार थे पांच छात्र,कार में सवार सभी पांचों युवक नालंदा इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्र थे। मिली जानकारी अनुसार नालंदा के चंडी की ओर से आ रही कार की गति इतनी अधिक थी कि गौढ़ापर के पास पहुंचते ही ड्राइवर ने कार पर से अपना नियंत्रण खो दिया। अनियंत्रित कार सड़क के किनारे बने एक गहरे गड्ढे में जा पलटी। टक्कर की आवाज इतनी जोरदार थी कि आसपास के लोग तुरंत मदद के लिए दौड़ पड़े।हादसे के बाद कार में फंस गए थे सभी छात्रस्थानीय लोगों और पुलिस की कड़ी मशक्कत के बाद कार में फंसे छात्रों को बाहर निकाला गया। एंबुलेंस की मदद से सभी को चंडी रेफरल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने आशीष कुमार और राहुल कुमार को मृत घोषित कर दिया। वहीं, धीरज कश्यप, उत्सव सिंह और शशिकांत की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है, जिनका अस्पताल में इलाज चल रहा है।हादसे की मुख्य वजह कार की तेज गति और गाड़ी का अनियंत्रित होना: थानाध्यक्षचंडी थाना अध्यक्ष सुमन कुमार ने बताया कि प्राथमिक जांच में हादसे की मुख्य वजह वाहन की अत्यधिक गति और अनियंत्रित होना सामने आई है। पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए बिहारशरीफ सदर अस्पताल भेज दिया है।
हादसे की खबर जैसे ही कॉलेज कैंपस में पहुंची, वहां सन्नाटा पसर गया और छात्रों व शिक्षकों के बीच शोक की लहर दौड़ गई। बता दे की आशीष कुमार इंजीनियरिंग के छात्र थे. जमुई जिला अंतर्गत चंद्रदीप थाना क्षेत्र के सोलहपुर गांव निवासी स्वर्गीय संजय सिंह के पुत्र आशीष कुमार की नालंदा में सड़क दुर्घटना में हुई मौत की सूचना पर परिवार में कोहराम मच गया. परिजनों का रो रो कर बुरा हाल है.बता दे की इंजीनियरिंग के छात्र आशीष कुमार की पिता संजय कुमार सिंह की पंजाब में निजी कंपनी में कार्य करने के दौरान बरसों पूर्व गंभीर बीमारी के कारण उनकी मौत हो गई थी. परिवार का भरण पोषण और बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी आशीष कुमार की मां आंगनबाड़ी सेविका ममता कुमारी के कंधे पर था. बता दें कि स्वर्गीय संजय सिंह के दो संतान पुत्र आशीष कुमार एवं पुत्री नन्ही कुमारी थी. जिसमें इंजीनियरिंग के छात्र आशीष कुमार की सड़क दुर्घटना में नालंदा में मौत हो गई.सोलहपुर गांव में अचानक हुई इस दुखद घटना से हर कोई हतप्रभ है। मृतक आशीष कुमार बड़ा ही मिलनसार था, इंटर परीक्षा पास करने के उपरांत वह इंजीयनरिंग की परीक्षा पास किया था,। नालंदा जिले के नूरसराय इंजीयनरिंग कालेज में बीटेक का छात्र था। बुधवार को परीक्षा खत्म हुई थी,वह अपने चार साथियों के साथ नई कार से कही घूमने जा रहा था, गाड़ी की रफ़्तार तेज होने के कारण गाड़ी नालंदा जिले के चंडी में दुर्घटनाग्रस्त हो गई, जिसमे दो दोस्तों की मौके पर मौत हो गई , माँ ने बहुत मेहनत से अपने जिगर के टुकड़ों को अच्छी पढ़ाई करवाने के लिए दृढसंकल्पित थी,ल।
एक विधवा की व्यथा की कितनी कष्टदायक होती है,कितनी संघर्षमय होती है ये तो माँ ही जाने। मृतक की माँ ममता कुमारीं गांव के ही आंगनबाड़ी सेविका के पद पर कार्यरत है। अल्प संसाधन में भी बच्चे को हमेशा ऊंची तालीम तथा अच्छे संस्कार के लिए दृढ़ संकल्पित थी। एक भाई बहन में बहन अर्चना कुमारीं बड़ी है जबकि आशीष कुमार छोटा है। लहभग सात-आठ वर्ष पूर्व मृतक के पिता संजय कुमार की आकसिमक।मौत ही गया,वही पांच वर्ष बाद मृतक के चाचा अरविंद सिंह की मौत एक दुर्घटना में हो गई। माँ ममता कुमारीं आंगनबाड़ी सेविका पद पर रहते हुए कम आय में बच्चे की बेहतर शिक्षा देने के लिए शुरू से ही बाहर रहकर पढ़ाई करवाया। लेकिन क्या पता है जब दुख दूर होने का समय आया तो दुख और उसके करीब आ जायेगा। अचानक जवान बेटा काल के गाल में समा जाने का दर्द असहनीय होता है।
