छपरा। जयप्रकाश विश्वविद्यालय में व्याप्त शैक्षणिक अनियमितताओं और प्रशासनिक शिथिलता के खिलाफ विश्वविद्यालय स्नातकोत्तर शिक्षक संघ ने मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को प्रशासनिक भवन के समक्ष आयोजित ‘धरना कार्यक्रम’ में शिक्षकों ने विश्वविद्यालय प्रशासन और विशेषकर कुलपति की कार्यशैली पर तीखा प्रहार किया।
सिर्फ निर्माण और सेमिनार तक सीमित है प्रशासन
धरना स्थल पर जुटे शिक्षकों को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन का ध्यान केवल निर्माण कार्यों और बड़े-बड़े सेमिनार या कॉन्फ्रेंस आयोजित करने पर है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन आयोजनों के पीछे मुख्य उद्देश्य केवल धन का दुरुपयोग है, जबकि छात्रों का भविष्य दांव पर लगा है।
परीक्षा कैलेंडर और छात्रों के मुद्दों पर सन्नाटा
वक्ताओं ने अपनी बात रखते हुए कहा, “प्रशासन यह नहीं सोच रहा कि छात्र कक्षा में कैसे आएं या परीक्षा का समयबद्ध कैलेंडर क्या हो? आज विश्वविद्यालय में परीक्षा और सत्र के संचालन को लेकर पूरी तरह से अराजकता व्याप्त है।” शिक्षकों ने इस बात पर रोष जताया कि शैक्षणिक सुधारों के बजाय केवल कागजी खानापूर्ति की जा रही है।
कुलपति पर ‘राजभवन’ के नाम पर गुमराह करने का आरोप
धारणा को संबोधित करते हुए एक शिक्षक नेता ने कुलपति पर तंज कसते हुए कहा कि कुलपति महोदय अक्सर ‘राजभवन से निर्देश लेने’ का बहाना बनाकर जिम्मेदारी से बचते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या राजभवन सिर्फ जेपीयू के लिए बना है? जो नियम पूरे बिहार के विश्वविद्यालयों के लिए स्पष्ट हैं, उनके लिए राजभवन जाने का ढोंग कर लोगों को मूर्ख बनाया जा रहा है।
प्रमुख मांगें
जिसमें समय पर परीक्षाओं का आयोजन और सत्र का नियमितीकरण,
छात्रों के लिए बेहतर शैक्षणिक माहौल और कक्षाओं का सुचारू संचालन एवं
विश्वविद्यालय के प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता लाना आदि शामिल है।
धरने पर बैठे शिक्षकों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती और शैक्षणिक व्यवस्था में सुधार नहीं आता, उनका आंदोलन चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगा। इस अवसर पर बड़ी संख्या में विश्वविद्यालय के शिक्षक और कर्मचारी उपस्थित रहे।
