मुक्ति का एकमात्र साधन भागवत श्रवण – पवन कुमार

Rakesh Gupta
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(हरिप्रसाद शर्मा) पुष्कर/ अजमेर/ यहाँ दाधीच भवन में चल रही भागवत कथा के द्वितीय दिवस पर व्यासपीठ कथावाचक पवन कुमार मालोदिया वारंगल ( तेलंगाना) ने भागवत श्रवण की महिमा बताई। उन्होंने कहा कि राजा परीक्षित की मृत्यु सातवें दिन तक्षक नाग के डसने की भविष्यवाणी ऋषियों द्वारा की गई थी एवं मुक्ति का एकमात्र साधन भागवत श्रवण बताया गया। उन्होंने भक्तों को बताया कि सांप के डसने से, जल में डूबने से, अग्नि में जलने से जीव अधोगति को प्राप्त होते हैं ।उनकी मुक्ति के लिए भागवत की कथा अवश्य करवानी चाहिए। उन स्थानों पर कलयुग का वास स्थानों पर होगा।


उन्होंने कहा कि इसमें एक जगह स्वर्ण भी है ।राजा परीक्षित के मस्तक पर सोने का मुकुट था ।जो अधर्म आचरण से प्राप्त किया गया था।
कलयुग ने अपनी विशेषता का कथा में वर्णन किया गया । जो धर्म या अधर्मयुक्त आचरण का फल अविलंब है ।

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कथा के अन्य प्रसंग में विदुर जी ने ठाकुर जी को केले का भोग लगाया। भीष्म स्तुति, शुक परीक्षित मिलन, सूत शौनक संवाद का भी व्यासपीठ से वर्णन किया। उपस्थित गणमान्य अतिथियों को व्यासपीठ से दुपट्टा पहनाकर आशीर्वाद प्रदान किया। कथा में गजेंद्र सिंह, परमेश्वर रिणवा, पवन मिश्रा अजमेर, मनीष व्यास जैतारण,माणकचन्द करेश्या शामिल थे ।


कथा में भगवान की लीलाओं के साथ मनमोहक झांकियों चित्रण करवाया गया। जिसमें बाणों की शय्या पर लेटे भीष्म पितामह, विदुर जी की झांकी मुख्य थी ।


कथा के मुख्य यजमान कमलकिशोर मालोदिया परिवार खरेश,सूरत द्वारा आयोजन किया गया है।कथा का समय प्रतिदिन दोपहर 1 से 5 बजे तक रखा गया है। कथा 25 मई तक चलेगी।

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