पटना। बिहार प्रदेश अग्रहरि वैश्य समाज के अध्यक्ष प्रशांत कुमार ने “कुंवारेपन का युग” (Era of Bachelorhood) विषय पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए समाज और युवाओं के नाम एक महत्वपूर्ण संदेश श्री राकेश कुमार, मीडिया प्रभारी, अग्रहरि वैश्य समाज के मार्फत जारी किया है। उन्होंने कहा कि आज हमारा समाज एक अत्यंत संवेदनशील और वैचारिक दौर से गुजर रहा है, जहाँ युवाओं को सही मार्गदर्शन देना अनिवार्य हो गया है।
बदलती सामाजिक सोच और बढ़ती उम्र में विवाह:
श्री प्रशांत कुमार ने कहा कि आज करियर और आत्मनिर्भरता की दौड़ में युवा सही समय पर विवाह का निर्णय नहीं ले पा रहे हैं। जीवनसाथी को लेकर लड़का और लड़की दोनों पक्षों की अपेक्षाएं (High Expectations) इतनी अधिक हो गई हैं कि आदर्श साथी की तलाश में उम्र निकलती जा रही है। इसका परिणाम यह हो रहा है कि एक उम्र के बाद माता-पिता का साथ छूटने पर युवाओं को गंभीर अकेलेपन और भावनात्मक सहारा न मिलने के कारण अवसाद (Depression) का सामना करना पड़ रहा है। देर से विवाह होने के कारण संतानोत्पत्ति में जैविक (Biological) समस्याएं भी आ रही हैं, जो सीधे तौर पर हमारे पारिवारिक और सामाजिक ताने-बाने को प्रभावित कर रही हैं। संयुक्त परिवारों के टूटने से सामाजिक सुरक्षा भी कम हुई है।
समाज निर्माण हेतु प्रदेश अध्यक्ष की अपील और सुझाव:
- परफेक्ट नहीं, अनुकूल साथी चुनें: विवाह के लिए किसी ‘परफेक्ट’ जीवनसाथी को खोजने के बजाय ‘अनुकूल’ (Compatible) जीवनसाथी चुनने पर ध्यान दें।
- समय पर निर्णय लें: करियर के साथ-साथ पारिवारिक जीवन को भी प्राथमिकता दें। दोनों का संतुलन ही जीवन को पूर्ण बनाता है।
- दिखावे और फिजूलखर्ची से दूरी: शादियों में स्टेटस सिंबल की होड़ को छोड़कर सादगी अपनाएं, ताकि विवाह किसी भी परिवार पर आर्थिक बोझ न बने।
- बुजुर्ग मित्र बनकर मार्गदर्शन करें: परिवार के बड़ों को युवाओं पर दबाव बनाने के बजाय मित्रवत व्यवहार कर सही समय पर सही निर्णय लेने में उनकी मदद करनी चाहिए।
श्री प्रशांत कुमार ने अंत में समाज के सभी प्रबुद्ध जनों से अपील की कि वे इस दिशा में आगे आएं और एक स्वस्थ, जागरूक और मजबूत समाज के निर्माण में अपना योगदान दें।
