डॉo संजय (हाजीपुर)- श्री अनन्त भगवान की पूजा- अर्चना का का माहात्म्य और विधान स्कन्द-पुराण में बतलाया गया है। इसके तहत सदियों की परंपरा के अनुसार श्री अनन्त भगवान की पूजा- अर्चना होती आ रही है।शुक्रवार को स्थानीय हाजीपुर रेलवे जंक्शन परिसर स्थित शिवमन्दिर पर श्रद्धा- भक्ति के साथ श्री अनन्त भगवान की पूजा-अर्चना की गई जिसमें अधिकाधिक की संख्या में महिला,पुरुष,बच्चे,युवा,युवती श्रद्धालुगण प्रातः काल से ही श्री अनन्त भगवान की पूजा- अर्चना के निमित चौदह गांठों वाले श्री अनन्त का धागा, ऋतु-फल केला,खीरा,सेव,दूध, धूप, अगरवत्ती लेकर शिवमन्दिर पर पहुंचे जहाँ पर पंडित श्री अनन्त भगवान की कथा बांच रहे थे। उपस्थित सभी श्रद्धालु श्री अनन्त भगवान की कथा का सहृदयता के साथ श्रवण किया। पंडित ने श्री अनन्त भगवान की कथा के संदर्भ में बताया कि जो भी मनुष्य भाद्रपद चतुर्दशी के दिन श्रद्धा-भक्ति के साथ श्री अनन्त भगवान की पूजा-अर्चना या व्रत करता है वह व्यक्ति सपरिवार धनधान्य से परिपूर्ण हो जाता है। श्री अनन्त भगवान की कथा समापन के उपरान्त आरती हुई और इसके उपरान्त श्रद्धालुगण श्री अनन्त का धागा, ऋतुफल खीरा के साथ दूध और पंचामृत से भरे पात्र में दोनों हाथों से घुमाते हुए पंडित जी के द्वारा पूछे गए वाक्य- क्या मथते हैं? – श्रद्धालुगण बोले – क्षीर समन्दर — क्या अनन्त भगवान मिले?— नहीं, पुनः– क्या मथते हैं?– क्षीर समन्दर —, अनन्त भगवान मिले — नहीं —, पुनः– क्या मथते हैं — क्षीर समन्दर — अनन्त भगवान मिले — हाँ मिले, इसके बाद पंडित के कथनानुसार श्री अनन्त का धागा और खीरा को श्रद्धालुगण अपने मस्तक से सटाकर प्रणाम किया और पूजा के निमित घर से लाये गये पात्र में रख दिया। इसके पश्चात पंडित ने सभी श्रद्धालुगण को पंचामृत का प्रसाद और श्री अनन्त भगवान पर चढ़ाए गए ऋतुफल उतारकर वितरित किये। प्रसाद ग्रहण करने के उपरान्त चौदह गांठों वाले श्री अनन्त का धागा पुरुष अपने दाहिने हाथ में और महिलाएं अपने बायीं हाथ में धारण किए। श्री अनन्त भगवान की पूजा-अर्चना के सन्दर्भ में शिवमन्दिर के पुजारी, अशोक बाबा ने बताया कि श्री अनन्त भगवान की पूजा स्कन्दपुराण के अनुसार सदियों से होती आई है और इस मन्दिर पर श्रद्धालुगण विगत कई वर्षों से आते हैं तथा भक्तिभाव से कथा का श्रवण कर प्रसाद ग्रहण करते हैं। भाद्रपद चतुर्दशी को श्री अनन्त भगवान की पूजा-अर्चना का माहात्म्य रहा है जिसको करने से सुख- समृद्धि में बढ़ोतरी होती है। बहुत से श्रद्धालुगण श्री अनन्त का व्रत भी रखते हैं। इस दिवस को श्रद्धालुगण अपने-अपने घर में मिष्ठान भोजन यथा – सेवई, पूरी, हलवा ईत्यादि का रसास्वादन करते हैं।
