अरुण अरोड़ा एवं अलोक के. नागपाल ने कहा—रवि चौहान के प्रयासों और बीसीसीआई के सहयोग से दिव्यांग क्रिकेट को मिलेगी नई पहचान और खिलाड़ियों को बेहतर अवसर।
जालंधर। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) द्वारा दिव्यांग क्रिकेटरों को प्रोत्साहित करने और उन्हें बेहतर सुविधाएं एवं अवसर उपलब्ध कराने की पहल का डिफरेंटली एबल्ड क्रिकेट काउंसिल ऑफ पंजाब ने स्वागत किया है। काउंसिल के पदाधिकारियों ने डिफरेंटली एबल्ड क्रिकेट काउंसिल ऑफ इंडिया (DCCI) के महासचिव रवि चौहान के निरंतर प्रयासों और दिव्यांग क्रिकेट के विकास के प्रति उनके समर्पण की सराहना की।डीसीसीआई नॉर्थ जोन कोऑर्डिनेटर अरुण अरोड़ा एवं पंजाब सचिव अलोक के. नागपाल ने कहा कि बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया द्वारा देश की सभी राज्य क्रिकेट एसोसिएशनों से दिव्यांग क्रिकेटरों को प्रोत्साहन, सुविधाएं और अवसर प्रदान करने की अपील इस खेल के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।अरुण अरोड़ा ने कहा कि बीसीसीआई के सहयोग से दिव्यांग क्रिकेटरों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने और आगे बढ़ने के नए अवसर मिल सकते हैं।

राज्य क्रिकेट एसोसिएशनों और संबंधित क्रिकेट संस्थाओं की सक्रिय भागीदारी से पंजाब सहित पूरे देश में दिव्यांग क्रिकेट को नई पहचान दिलाई जा सकती है।पंजाब सचिव अलोक के. नागपाल ने कहा कि दिव्यांग खिलाड़ियों में प्रतिभा और खेल के प्रति जुनून की कोई कमी नहीं है। उन्हें उचित प्रशिक्षण, बेहतर खेल सुविधाएं और प्रतियोगिताओं में भाग लेने के अवसर उपलब्ध कराना आवश्यक है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि पंजाब में भी काउंसिल और संबंधित क्रिकेट संस्थाओं के सहयोग से दिव्यांग क्रिकेट को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाया जाएगा।दोनों पदाधिकारियों ने डीसीसीआई महासचिव रवि चौहान के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि दिव्यांग क्रिकेट को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने, खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने और उनके लिए बेहतर अवसर तैयार करने की दिशा में उनका निरंतर योगदान महत्वपूर्ण है।
उन्होंने विश्वास जताया कि बीसीसीआई के सहयोग और रवि चौहान के निरंतर प्रयासों से दिव्यांग क्रिकेट को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।डिफरेंटली एबल्ड क्रिकेट काउंसिल ऑफ पंजाब ने सभी राज्य क्रिकेट एसोसिएशनों से अपील की कि वे इस पहल में सक्रिय सहयोग दें, ताकि दिव्यांग क्रिकेटरों को भी मुख्यधारा के क्रिकेट की तरह प्रशिक्षण, प्रतियोगिताओं और अपनी प्रतिभा दिखाने के पर्याप्त अवसर मिल सकें।“दिव्यांग खिलाड़ियों को अवसर, सम्मान और उचित मंच देना ही समावेशी क्रिकेट की सच्ची पहचान है।”काउंसिल को उम्मीद है कि बीसीसीआई, डीसीसीआई और राज्य क्रिकेट संस्थाओं के सामूहिक सहयोग से पंजाब सहित पूरे देश में दिव्यांग क्रिकेट का भविष्य और अधिक उज्ज्वल होगा।
