छपरा:संविधान के शिल्पकार बाबा साहेब को शत-शत नमन, समानता और न्याय का अमर संदेश आज भी प्रासंगिक

Rakesh Gupta
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बाबा साहेब अंबेडकर जयंती: अधिकार, सम्मान और सामाजिक न्याय की अलख जगाने वाले महानायक को देश का सलाम

गंगा सिंह महाविद्यालय में हुआ जयंती पर कार्यक्रम का आयोजन

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छपरा। देश के संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती आज पूरे देश में श्रद्धा, सम्मान और उत्साह के साथ मनाई गई। इस अवसर पर राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों एवं आम नागरिकों ने बाबा साहेब के विचारों को याद करते हुए उनके दिखाए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।


कार्यक्रमों में वक्ताओं ने कहा कि बाबा साहेब केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक विचारधारा हैं, जिन्होंने भारत को समानता, न्याय और बंधुत्व का मार्ग दिखाया। उन्होंने भारतीय समाज के उस वर्ग को आवाज दी, जो सदियों से उपेक्षित और वंचित रहा। संविधान के माध्यम से उन्होंने हर नागरिक को समान अधिकार प्रदान करने का कार्य किया।


वक्ताओं ने कहा कि बाबा साहेब ने संविधान में जो प्रावधान किए, उनका मूल उद्देश्य समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को मुख्यधारा में लाना था। शिक्षा, रोजगार, सामाजिक सुरक्षा और समान अवसर जैसे अधिकार उनके दूरदर्शी सोच का परिणाम हैं। उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि कोई भी व्यक्ति जाति, धर्म या वर्ग के आधार पर भेदभाव का शिकार न हो।


हालांकि, वर्तमान समय में संविधान के मूल सिद्धांतों के पालन को लेकर चिंता भी व्यक्त की गई। वक्ताओं ने कहा कि आज संविधान की भावना के अनुरूप कार्य करने के बजाय कई बार उसका उल्लंघन देखने को मिलता है। सत्ता की प्राप्ति के लिए नैतिक मूल्यों और लोकतांत्रिक परंपराओं को नजरअंदाज किया जा रहा है, जो बाबा साहेब के सपनों के विपरीत है।


इस अवसर पर यह भी कहा गया कि अंबेडकर जयंती को केवल औपचारिक आयोजन तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि इसे जनजागरण का माध्यम बनाना होगा। समाज के प्रत्येक वर्ग को यह समझना होगा कि संविधान केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि देश की आत्मा है, जिसकी रक्षा करना हर नागरिक का कर्तव्य है।


सच्ची श्रद्धांजलि और संदेश:
वक्ताओं ने स्पष्ट रूप से कहा कि बाबा साहेब को सच्ची श्रद्धांजलि केवल माल्यार्पण या भाषणों से नहीं, बल्कि उनके विचारों को जीवन में उतारने से दी जा सकती है। जब समाज में समानता स्थापित होगी, जब हर व्यक्ति को न्याय मिलेगा और जब भेदभाव समाप्त होगा, तभी बाबा साहेब के सपनों का भारत साकार होगा।


जयंती मनाने का उद्देश्य:
अंबेडकर जयंती का मुख्य उद्देश्य समाज को उनके विचारों से जोड़ना, संविधान के प्रति जागरूकता बढ़ाना और सामाजिक समरसता को मजबूत करना है। यह दिन हमें यह याद दिलाता है कि लोकतंत्र की मजबूती केवल सरकार से नहीं, बल्कि नागरिकों की जिम्मेदारी और जागरूकता से होती है। लोगों ने यह संकल्प लिया कि वे संविधान के मूल्यों-न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व-का पालन करेंगे और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए सक्रिय भूमिका निभाएंगे।


बहरहाल आज देश भर में बड़े ही धूमधाम से विभिन्न राजनीतिक दलों सामाजिक संगठन और नागरिकों द्वारा अंबेडकर जयंती मनाई जा रहा है रही है। अंबेडकर जयंती केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि एक चेतना का पर्व है, जो हमें अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति सजग रहने की प्रेरणा देता है।


इस बीच गंगा सिंह महाविद्यालय में बड़े ही धूमधाम से बाबासाहेब की जयंती का आयोजन किया गया। महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर प्रमेंद्र रंजन ने संबोधित करते हुए कहा कि बाबा साहब के विचार हमें एक न्यायप्रिय और समावेशी समाज बनाने की प्रेरणा देते हैं। इस अवसर पर
गंगा सिंह महाविद्यालय, छपरा में आज भीमराव अम्बेडकर जयंती सह महाविद्यालय स्थापना दिवस समारोह का आयोजन किया गया। सर्वप्रथम गंगा सिंह महाविद्यालय के संस्थापक की आदमकद प्रतिमा पर प्राचार्य, शिक्षकों, शिक्षकेत्तर कर्मचारियों तथा उपस्थित छात्र-छात्राओं द्वारा पुष्प अर्पित किया गया। तत्पश्चात उपस्थित लोगों के द्वारा भारत रत्न बाबा साहब अम्बेडकर के तैल चित्र पर माल्यार्पण किया गया।
सभा को संबोधित करते हुए प्राचार्य प्रो प्रमेन्द्र रंजन सिंह ने कहा कि भारतीय संविधान के शिल्पकार बाबा साहब अम्बेडकर बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। वे आजीवन सामाजिक समानता,भाईचारा और समाज सुधार के कार्य में संलग्न रहे। उन्होंने श्रमिकों, किसानों और महिलाओं के अधिकारों का भी समर्थन किया था।


प्राचार्य ने कहा कि समानता और न्याय ही किसी भी स्वस्थ और सुरक्षित समाज की नींव होती है। डॉ अम्बेडकर का भी यह मानना था कि जीवन में सफलता पाने के लिए शिक्षा का महत्व अपार है। ज्ञान की शक्ति को वे सबसे महान मानते थे। ‘शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो’ के उनके विचार हमें एक न्यायप्रिय और समावेशी समाज बनाने की प्रेरणा देते हैं।


इस अवसर पर सहायक प्राध्यापक डॉक्टर कमल अहमद, डॉ पुनीत कुमार पांडेय, डॉ कुमकुम रे, डॉ विजया वैजयंती, डॉ संतोष कुमार सिंह, श्री अभिषेक चतुर्वेदी, डॉ दिनेश यादव, डॉ फ़ख्र शायाण, डॉ राजेश मांझी, डॉ रुद्र नारायण, डॉ नारायण दत्त शर्मा, श्री विवेक रंजन सिंह, श्री अनिल सिंह आदि के साथ-साथ छात्र-छात्राएं भी उपस्थित थे।

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