नर्सरी से यूकेजी तक सालाना लाखों से अधिक की फीस, अभिभावकों में असंतोष , अंकुश लगाने की उठी मांग
नाजायज वसूली पर सियासत तेज, जांच की उठी मांग
डीपीएस प्रबंधन द्वारा मोबाइल पर जानकारी देने से किया इनकार
छपरा। सारण जिले के गरखा प्रखंड अंतर्गत भैसमारा स्थित श्रीनिवास मेडिकल कॉलेज स्थित संचालित दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस) इन दिनों अभिभावकों के बीच भारी नाराजगी का कारण बना हुआ है। स्कूल प्रबंधन पर मनमानी फीस वसूली, री-एडमिशन और विभिन्न मदों के नाम पर मोटी रकम लेने का मामला सामने आए हैं। खास बात यह है कि यह सब उस समय हो रहा है, जब जिला प्रशासन ने निजी स्कूलों की फीस को लेकर सख्त दिशा-निर्देश जारी कर रखा है।
जानकारी के अनुसार, विद्यालय में नर्सरी से यूकेजी तक के बच्चों के लिए “टॉडलर” और “एक्सप्लोरर” नाम से संचालित कक्षाओं की सालाना लगभग लाखों रुपये से अधिक वसूल की जा रही है। अभिभावकों का कहना है कि यह फीस पटना के प्रतिष्ठित स्कूलों से भी अधिक है, जिससे मध्यम वर्गीय परिवारों पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है।
गौरतलब है कि जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने 4 अप्रैल 2026 को निजी विद्यालयों द्वारा मनमानी वसूली की शिकायतों के बाद सख्त आदेश जारी किया था। अपने आदेश में उन्होंने एडमिशन, ड्रेस, किताब और अन्य शुल्कों के लिए स्पष्ट मानक तय करते हुए सभी स्कूलों को इसका अनुपालन करने का निर्देश दिया था। मिली जानकारी के अनुसार अधिकांश स्कूलों ने इस आदेश का पालन भी शुरू कर दिया है. लेकिन डीपीएस पर इसका कोई खास असर नहीं दिख रहा है।
सूत्रों के अनुसार, स्कूल द्वारा विंटर किट के नाम पर 15 से 20 हजार रुपये, समर यूनिफॉर्म के लिए लगभग 8100 रुपये, बुक किट के लिए 10 हजार रुपये और समर वेकेशन, सालाना व डेवलपमेंट फीस के नाम पर करीब 30 हजार रुपये वसूले जा रहे हैं। इसके अलावा ट्यूशन फीस और अन्य शुल्क मिलाकर कुल खर्च लगभग एक लाख रुपये से अधिक यह जाने की जानकारी मिली है।
एक और चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि विद्यालय द्वारा “जायज” फीस ऑनलाइन माध्यम से दिल्ली पब्लिक स्कूल के नाम पर ली जाती है, जबकि कथित “नाजायज” वसूली मेसर्स विद्याविबेश इंटरप्राइजेज के नाम पर ऑफलाइन की पर्ची जाती है, जिसकी रसीद भी अलग से दी जाती है। इस व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं।
नाम नहीं छापने की शर्त पर कई अभिभावकों ने बताया कि बच्चों के बेहतर भविष्य की उम्मीद में उन्होंने स्कूल में नामांकन तो करा लिया, लेकिन अब फीस के बोझ से परेशान हैं। उनका कहना है कि जिलाधिकारी के स्पष्ट आदेश के बावजूद स्कूल प्रबंधन पुराने सिस्टम के तहत ही फीस वसूली कर रहा है।
इधर, इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक सरगर्मी भी तेज हो गई है। भारतीय लोक चेतना पार्टी के राष्ट्रीय सचिव सह प्रवक्ता राजेश कुशवाहा ने इस मामले को गंभीर बताते हुए जिलाधिकारी से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कहा, “जिलाधिकारी द्वारा जारी आदेश का अनुपालन हर हाल में सुनिश्चित होना चाहिए। डीपीएस द्वारा की जा रही नाजायज वसूली की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए।”
उन्होंने यह भी कहा कि ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से ली जा रही फीस की जांच होनी चाहिए और अब तक वसूली गई अवैध राशि को अभिभावकों को वापस कराया जाए।
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या अभिभावकों को राहत मिल पाती है या नहीं। फिलहाल, डीपीएस की फीस व्यवस्था को लेकर सवालों का सिलसिला जारी है।
इस संबंध में दिल्ली पब्लिक स्कूल के इंचार्ज जिनका मोबाइल नंबर 7070 533893 पर जिलाधिकारी के निजी स्कूलों के लिए जारी पत्र के बारे में बात करने पर उन्होंने कहा कि फोन पर हम इस विषय में जानकारी नहीं दे सकते हैं।
