बाबासाहेब ने बौद्ध धर्म की दीक्षा लेकर सामाजिक परिवर्तन का दिया ऐतिहासिक संदेश दिया: कुलपति

Rakesh Gupta
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जेपी विश्वविद्यालय में जयंती पर विचार गोष्ठी क्या हुआ आयोजन


छपरा: जयप्रकाश विश्वविद्यालय में मंगलवार को संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती कुलपति प्रो. परमेन्द्र कुमार बाजपेई की अध्यक्षता में श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। कार्यक्रम की शुरुआत बाबासाहेब के तैल चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन करते हुए की गई।

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इस अवसर पर प्रो. अजीत कुमार तिवारी (अध्यक्ष, स्नातकोत्तर अर्थशास्त्र विभाग), प्रो. विभुकुमार, प्रो. कमल जी (अध्यक्ष, स्नातकोत्तर भूगोल विभाग), प्रो. आशा रानी (अध्यक्ष, स्नातकोत्तर मनोविज्ञान विभाग) तथा कार्यक्रम समन्वयक राष्ट्रीय सेवा योजना प्रो. हरिश्चंद्र सहित कई शिक्षकों ने श्रद्धासुमन अर्पित किए।


कार्यक्रम में वक्तव्य देते हुए प्रो. विभुकुमार ने कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचार आज भी देश के आर्थिक और सामाजिक ढांचे की आधारशिला हैं। उन्होंने बताया कि बाबासाहेब की सोच से प्रेरित होकर ही भारतीय रिजर्व बैंक की स्थापना हुई।


वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि बाबासाहेब ने हमेशा जातिविहीन और समतामूलक समाज की स्थापना पर जोर दिया। प्रो. कमल ने कहा कि उनका पूरा जीवन सामाजिक समानता और न्याय की स्थापना के लिए समर्पित रहा। जबकि अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति प्रो. बाजपेई ने कहा कि वर्ष 1956 में बाबासाहेब ने बौद्ध धर्म की दीक्षा लेकर सामाजिक परिवर्तन का ऐतिहासिक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि “यदि सत्य और संघर्ष को समझना है, तो बाबासाहेब को पढ़ना होगा।” उन्होंने समाज में न्याय, समता और स्वतंत्रता के मूल्यों को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया।


कार्यक्रम का संचालन प्रो. हरिश्चंद्र ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. रमेश कुमार ने किया। इस अवसर पर डॉ. विद्याधर, डॉ. विवेक, डॉ. होशियार सिंह मुंड, इंजीनियर प्रमोद कुमार सिंह तथा विवेक कुमार सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे ।

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