सरकारी कार्यक्रमों में पत्रकारों की उपेक्षा पर भड़का नेशनल जर्नलिस्ट एसोसिएशन, मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन

Rakesh Gupta
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  • महिला प्रदेश अध्यक्षा पूजा मिश्रा की दो टूक- “महिला पत्रकारों के लिए न्यूनतम सुविधाएं और सुरक्षा तक नहीं, प्रशासन की नीयत पर उठ रहे सवाल”

सीवान/पटना :बिहार में सरकारी कार्यक्रमों के दौरान कवरेज करने जाने वाले पत्रकारों की लगातार हो रही उपेक्षा और प्रशासनिक अव्यवस्था को लेकर मीडियाकर्मियों में भारी आक्रोश है। इस गंभीर विषय पर पत्रकारों के हित और अधिकारों के लिए अग्रणी संगठन ‘नेशनल जर्नलिस्ट एसोसिएशन’ ने कड़ा रुख अपनाया है। एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राकेश कुमार गुप्ता ने बिहार के मुख्यमंत्री को एक औपचारिक ज्ञापन भेजकर सरकारी आयोजनों में पत्रकारों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने और राज्य में अविलंब ‘पत्रकार सुरक्षा कानून’ लागू करने की मांग की है।

महिला पत्रकारों की सुरक्षा और गरिमा दांव पर :पूजा मिश्रा, बिहार महिला प्रदेश अध्यक्षा
इस मामले पर महिला मीडियाकर्मियों की व्यावहारिक समस्याओं को सामने रखते हुए नेशनल जर्नलिस्ट एसोसिएशन की बिहार महिला प्रदेश अध्यक्ष पूजा मिश्रा ने अपना तीखा बयान जारी किया है। महिला प्रदेश अध्यक्ष ने कहा, “सरकारी कार्यक्रमों में जिला प्रशासन की घोर लापरवाही के कारण सबसे ज्यादा परेशानी महिला पत्रकारों को झेलनी पड़ती है। चिलचिलाती धूप और भीषण गर्मी में पेयजल की व्यवस्था न होना और कार्यक्रम स्थलों पर महिलाओं के लिए बुनियादी सुविधाओं (जैसे स्वच्छ शौचालय या बैठने की सुरक्षित व्यवस्था) का अभाव होना बेहद शर्मनाक है।” उन्होंने आगे कहा, “एक तरफ सरकार महिला सशक्तिकरण की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ फील्ड में काम कर रही महिला पत्रकारों को सुरक्षा और सम्मान देने में प्रशासन पूरी तरह विफल साबित हो रहा है। अगर, सरकारी आयोजनों में महिला पत्रकारों की सुरक्षा और गरिमा सुनिश्चित नहीं की गई, तो राज्य भर की महिला पत्रकार इसके खिलाफ मोर्चा खोलेंगी।”

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सभी जिलों में अधिकारी बेलगाम, सम्मान से समझौता नहीं :अबोध ठाकुर, प्रदेश अध्यक्ष

वहीं बिहार के सभी जिलों की स्थिति को सामने रखते हुए बिहार प्रदेश अध्यक्ष अबोध ठाकुर ने कहा है कि बिहार के लगभग हर जिले से अधिकारियों द्वारा पत्रकारों को प्रताड़ित और उपेक्षित करने की खबरें लगातार संगठन को मिल रही हैं। सीवान की घटना इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है। अगर जिला स्तर के अधिकारियों ने अपना रवैया नहीं सुधारा और पत्रकारों को सम्मानजनक स्थान व मूलभूत सुविधाएं नहीं दीं, तो बिहार प्रदेश कार्यकारिणी चुप नहीं बैठेगी। हम सड़क से लेकर सचिवालय तक उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

प्रशासनिक मनमानी अनुचित :अभिषेक श्रीवास्तव, राष्ट्रीय संगठन सचिव
वहीं, मामले पर ऐतराज जताते हुए राष्ट्रीय संगठन सचिव अभिषेक श्रीवास्तव ने अपने बयान में कहा कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को इस तरह हाशिए पर धकेलना अनुचित है, जो प्रशासनिक संवेदनहीनता की पराकाष्ठा को जाहिर करता है। अधिकारी यह भूल जाते हैं कि पत्रकार अपनी जान जोखिम में डालकर सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुंचाते हैं। यदि राज्य सरकार ने इस दिशा में तुरंत कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो संगठन पूरे बिहार में सरकारी कार्यक्रमों के मीडिया कवरेज के पूर्ण बहिष्कार पर विचार करने को मजबूर होगा।

सीवान के ‘सहयोग शिविर’ में सामने आई भारी अव्यवस्था

गौरतलब है कि हाल हीं में 16 जून को सीवान के पपौर गाँव में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का कार्यक्रम “सहयोग शिविर” आयोजित था। इस वीआईपी कार्यक्रम में समाचार संकलन के लिए पहुंचे मीडियाकर्मियों को भारी प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। भीषण गर्मी और तपती धूप के बावजूद प्रशासन द्वारा पत्रकार दीर्घा (प्रेस गैलरी) में पीने के पानी तक की व्यवस्था नहीं की गई थी। मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में एनजेए ने इस कार्यक्रम का विशेष रूप से उल्लेख किया है। ज्ञापन के अनुसार, कार्यक्रम स्थल पर पत्रकारों के वाहनों के लिए कोई पार्किंग स्थल नहीं बनाया गया था। इसके कारण मीडियाकर्मियों को आम नागरिकों की तरह सभा स्थल से काफी दूर यत्र-तत्र गाड़ियां खड़ी करनी पड़ीं। यही नहीं, पत्रकार दीर्घा तक जाने के लिए कोई सुरक्षित मार्ग भी निर्धारित नहीं था, जिससे पत्रकारों को भारी भीड़ के बीच चिलचिलाती धूप में पैदल सफर तय करना पड़ा। वहीं सभा स्थल पर बने पत्रकार दीर्घा में पत्रकारों के लिए पेयजल की भी व्यवस्था नहीं की गई थी। संगठन का कहना है कि ऐसी शिकायतें अब बिहार के लगभग हर जिले से सामने आ रही हैं, जो पत्रकारों के मौलिक अधिकारों का हनन है।

वर्षों से लंबित है पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग

एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राकेश कुमार गुप्ता ने कहा कि संगठन पिछले कई वर्षों से बिहार के पत्रकारों की सुरक्षा के लिए ‘पत्रकार सुरक्षा कानून’ बनाने की मांग कर रहा है। इसके बावजूद राज्य सरकार द्वारा अब तक कोई ठोस और सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया है, जो कि अत्यंत दुखद है।

प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया और मुख्य सचिव को भी भेजी प्रतिलिपि
एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री से नम्र निवेदन किया है कि वे इस लापरवाही का संज्ञान लें और सभी जिला प्रशासनों को सरकारी कार्यक्रमों में पत्रकारों के लिए सुगम प्रवेश, सुरक्षित पार्किंग और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाएं अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करने का आदेश जारी करें। वहीं इस मामले की गंभीरता को देखते हुए इस ज्ञापन की प्रतिलिपि प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) के अध्यक्ष व सचिव, बिहार के मुख्य सचिव तथा सूचना एवं जन-संपर्क विभाग (IPRD) के सचिव एवं निदेशक को भी आवश्यक कार्रवाई हेतु भेजी गई है।

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