जयपुर में SUV बनीं मौत की बड़ी वजह- सड़क हादसों में 1001 मौतें, 555 सुसाइड केस ने भी बढ़ाई चिंता

Rakesh Gupta
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(हरिप्रसाद शर्मा) जयपुर : राजस्थान की राजधानी जयपुर देश के सबसे ज्यादा हादसाग्रस्त महानगरों में शामिल हो गई है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) की “एक्सीडेंटल डेथ्स एंड सुसाइड्स इन इंडिया 2024” रिपोर्ट के अनुसार जयपुर में वर्ष 2024 के दौरान कुल 2,959 आकस्मिक मौतें दर्ज की गईं। इस आंकड़े के साथ जयपुर देश के 53 बड़े शहरों में पांचवें स्थान पर पहुंच गया है। रिपोर्ट के मुताबिक सड़क हादसे जयपुर में मौतों की सबसे बड़ी वजह बनकर सामने आए हैं। वर्ष 2024 में जयपुर में ट्रैफिक हादसों में 1,001 लोगों की मौत हुई, जो दिल्ली के बाद देश के बड़े शहरों में दूसरा सबसे बड़ा आंकड़ा है। वहीं 860 लोगों की मौत सड़क दुर्घटनाओं में दर्ज हुई और 2,580 लोग घायल हुए।

SUV और कारें बनीं सबसे बड़ा खतरा

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एनसीआरबी रिपोर्ट में सामने आया है कि जयपुर में सबसे ज्यादा जानलेवा हादसे SUV, कार और जीप से जुड़े रहे। इन वाहनों से जुड़े हादसों में 135 लोगों की मौत हुई। इसके अलावा ट्रक और मिनी ट्रकों से जुड़े हादसों में 77 लोगों की जान गई, जबकि बसों से जुड़े हादसों में 6 मौतें दर्ज की गईं।

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि पैदल चलने वाले लोग भी जयपुर की सड़कों पर सुरक्षित नहीं हैं। शहर में 187 पैदल यात्रियों की सड़क हादसों में मौत हुई। यह आंकड़ा बताता है कि तेज रफ्तार और कमजोर पैदल यात्री इंफ्रास्ट्रक्चर शहर में बड़ा खतरा बन चुका है।

ओवरस्पीडिंग सबसे बड़ा कारण

एनसीआरबी के अनुसार देशभर के बड़े शहरों में सड़क हादसों में मौत का सबसे बड़ा कारण ओवरस्पीडिंग रहा। कुल सड़क हादसा मौतों में 52.8 प्रतिशत मौतें तेज रफ्तार की वजह से हुईं। वहीं लापरवाही से ड्राइविंग और खतरनाक ओवरटेकिंग के कारण 30.1 प्रतिशत लोगों की जान गई।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि शाम 6 बजे से रात 9 बजे के बीच सबसे ज्यादा सड़क हादसे हुए। विशेषज्ञों के मुताबिक इस दौरान ट्रैफिक दबाव, जल्दबाजी और तेज रफ्तार दुर्घटनाओं की बड़ी वजह बनती है।

राजस्थान भी हादसों में देश के टॉप राज्यों में

राज्य स्तर पर देखें तो राजस्थान में वर्ष 2024 के दौरान कुल 30,794 आकस्मिक मौतें दर्ज की गईं। यह देश में हुई कुल आकस्मिक मौतों का 6.6 प्रतिशत है। राजस्थान की आकस्मिक मृत्यु दर प्रति लाख आबादी पर 37.5 रही, जो राष्ट्रीय औसत 33.3 से काफी ज्यादा है। राजस्थान में ट्रैफिक हादसों में 12,284 लोगों की मौत हुई, जिससे यह देश के सबसे प्रभावित राज्यों में शामिल हो गया।

मानसिक स्वास्थ्य भी बड़ी चिंता

एनसीआरबी रिपोर्ट ने राजस्थान में बढ़ते आत्महत्या मामलों को लेकर भी चिंता जताई है। राज्य में वर्ष 2024 के दौरान कुल 5,530 लोगों ने आत्महत्या की, जिनमें 4,042 पुरुष और 1,488 महिलाएं शामिल हैं। केवल जयपुर शहर में ही 555 आत्महत्या के मामले दर्ज हुए। इनमें 404 पुरुष और 151 महिलाएं शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार देशभर में पारिवारिक समस्याएं, बीमारी और नशे की लत आत्महत्या के प्रमुख कारण रहे।

विशेषज्ञों ने बताई वजह

विशेषज्ञों का मानना है कि जयपुर में तेजी से बढ़ती आबादी, वाहनों का दबाव, शहर का विस्तार और ट्रैफिक नियमों की कमजोर पालना हादसों की बड़ी वजह है। खासकर अजमेर रोड, दिल्ली रोड, टोंक रोड, रिंग रोड और बड़े शहरी कॉरिडोर पर तेज रफ्तार हादसे लगातार बढ़ रहे हैं।

रोड सेफ्टी विशेषज्ञों ने ओवरस्पीडिंग पर सख्त कार्रवाई, बेहतर फुटपाथ और पैदल पार पथ, ब्लैक स्पॉट सुधार, ट्रॉमा केयर सिस्टम मजबूत करने और लगातार जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत बताई है। एनसीआरबी के आंकड़े संकेत दे रहे हैं कि अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो जयपुर देश के सबसे खतरनाक शहरी क्षेत्रों में और ऊपर पहुंच सकता है।

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