(हरिप्रसाद शर्मा) पुष्कर/ अजमेर : पीठाधीश्वर एवं रमणरेती आश्रम-मथुरा के संस्थापक संत गुरू शरणानंद महाराज शुक्रवार को पुष्कर से नाराजगी के साथ विदा हो गए। खास बात यह रही कि उनके इस प्रवास में प्रशासनिक लापरवाही और अव्यवस्था ने उनके मनोबल को ठेस पहुंचाई। महाराज गुरूवार शाम हेलीकॉप्टर से पुष्कर पहुंचे और यहां चल रहे 43 दिवसीय शत गायत्री पुरश्चरण महायज्ञ में शामिल होने आए थे। लेकिन हेलीपेड पर सुरक्षा और प्रशासनिक इंतजामों का अभाव देख कर उन्होंने गहरी नाराजगी जताई।
यहां लोगों की भारी भीड़ ने हेलीकॉप्टर के आसपास जमकर फोटो खिंचाई की और स्वागत में हडकंप मच गया। इस अफरा-तफरी के बीच तीर्थ पुरोहितों और अनुयायियों में हल्की हाथापाई तक हुई, जिससे महाराज पूरी तरह खफा हो गए। सूत्रों के अनुसार शरणानंद महाराज ने उच्व स्तर पर इस प्रशासनिक अव्यवस्था की शिकायत भी दर्ज कराई।
शुक्रवार को उनके रवाना होने के समय पुलिस ने हेलीपेड को सुरक्षा घेरे में लिया और केवल चुनिंदा प्रबुद्धजनों को ही प्रवेश की अनुमति दी। विदाई देने वालों में हरिसेवा धाम भीलवाड़ा के महामंडलेश्वर हंसाराम उदासीन, राम बाबू दुसाद, कन्हैयालाल और जगदीश कुर्डिया प्रमुख थे।
रिसॉर्ट से शिष्य के बंगले तक
शरणानंद महाराज ने पुष्कर में केवल एक रात ठहरी। उन्होंने अपने नजदीकी शिष्य के बंगले पर रात्रि भोज किया, जबकि रात का विश्राम सूरजकुंड स्थित रिसोर्ट में किया। शुक्रवार दोपहर तक रिसोर्ट में ही रहे और 1.15 बजे हेलीकॉप्टर से पुष्कर से गोकुल-मथुरा के लिए रवाना हुए।
