पृथ्वी नहीं, मानवता संकट में है” — डॉ. निखिल कांत

Rakesh Gupta
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“नई दिल्ली, 5 जून 2026। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर जलवायु संकट जागरूकता अभियान ‘विश्व निशाने पर है’ (VNPH) द्वारा आयोजित वैश्विक ऑनलाइन कार्यक्रम में अभियान के संस्थापक डॉ. निखिल कांत ने कहा कि पृथ्वी को नहीं, बल्कि मानवता को बचाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि पृथ्वी अपनी प्राकृतिक यात्रा जारी रखेगी, लेकिन मनुष्य को अपनी असंतुलित जीवनशैली और उसके दुष्परिणामों से स्वयं को बचाना होगा।वीएनपीएच अभियान की स्थापना के 22 वर्ष पूर्ण होने तथा पृथ्वी दिवस (22 अप्रैल) से विश्व पर्यावरण दिवस (5 जून) तक चले 45 दिवसीय वैश्विक जागरूकता अभियान के समापन अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में नीति-निर्माताओं, कलाकारों, पत्रकारों, शिक्षाविदों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, स्वास्थ्य विशेषज्ञों, युवाओं और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।प्रख्यात भोजपुरी साहित्यकार, कवि, टीवी प्रस्तोता और सांस्कृतिक व्यक्तित्व मनोज भावुक ने जलवायु जागरूकता बढ़ाने में साहित्य, भाषा और संस्कृति की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि जलवायु संकट केवल पर्यावरण या विज्ञान का विषय नहीं, बल्कि मानव जीवन और संवेदनाओं से जुड़ा प्रश्न है। इसलिए इसकी चर्चा संस्कृति, लोकभाषाओं और कहानियों के माध्यम से भी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि साहित्य और कला लोगों को प्रकृति से जोड़ने तथा सकारात्मक व्यवहार परिवर्तन लाने के प्रभावी माध्यम हैं।

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कार्यक्रम की भूमिका प्रस्तुत करते हुए मनोज भावुक ने कहा कि जलवायु परिवर्तन पर संवाद केवल नीतियों और सरकारी योजनाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे आम लोगों की भाषा, संस्कृति और दैनिक जीवन से जोड़ना होगा। पर्यावरणीय संदेश तभी प्रभावी होते हैं, जब वे लोगों की अपनी अभिव्यक्ति में उन तक पहुँचते हैं।वरिष्ठ पत्रकार हिमांशु शेखर मिश्रा ने अपने बीज वक्तव्य में कश्मीर सहित देश के विभिन्न हिस्सों में घट रही पर्यावरणीय घटनाओं का उल्लेख करते हुए जलवायु संकट की गंभीरता को रेखांकित किया। मालदीव की पूर्व कैबिनेट मंत्री तथा विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के कार्यकारी बोर्ड की पूर्व अध्यक्ष डॉ. मरियम शकीला ने जलवायु संकट पर चिंता व्यक्त की।

अभिनेता, लेखक और रंगकर्मी अखिलेन्द्र मिश्रा ने प्रभावशाली काव्य-पाठ प्रस्तुत किया। अन्य प्रमुख वक्ताओं में प्रसिद्धि सिंह, डॉ. श्रीनिवास राव पुलिजाला, डॉ. निलय रंजन सिंह और सत्यकाम आनंद शामिल रहे।कार्यक्रम में वीएनपीएच फाउंडेशन के अध्यक्ष के. पियूष, निदेशक डॉ. के. अंजलि, सचिव मीनाक्षी कुमारी तथा विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। तकनीकी संचालन हिमांशु सिंह ने किया।इस अवसर पर वीएनपीएच की नई वेबसाइट का शुभारंभ किया गया तथा “VNPH Action Beyond Acting” और “VNPH 3Cs: Climate Conscious CEOs” जैसी नई पहलों की शुरुआत हुई। वहीं, वीएनपीएच के शुभंकर एमओसीएलआई (MOCLI) के मानवीय चेहरे मास्टर मेहरांश मृदुल ने ‘पोएटिक क्लाइमेटोलॉजी’ पर विशेष प्रस्तुति दी।कार्यक्रम के अंत में दुनिया भर के लोगों, संस्थानों और समुदायों से जलवायु-सचेत जीवनशैली अपनाने तथा वीएनपीएच के वैश्विक अभियान से जुड़कर पृथ्वी और मानवता के बेहतर भविष्य के निर्माण में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया गया।

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